Uttarakhand Flood: उत्‍तराखंड में भारी तबाही की आशंका, जानें कोई ग्‍लेशियर कैसे और क्‍यों टूटता है

Uttarakhand Flood: उत्‍तराखंड में भारी तबाही की आशंका, जानें कोई ग्‍लेशियर कैसे और क्‍यों टूटता है

हाइलाइट्स:

  • उत्‍तराखंड के चमोली जिले में टूटा ग्‍लेशियर, भारी तबाही की आशंका
  • धौलीगंगा और अलकनंदा नदी के किनारे रहने वालों को ज्‍यादा खतरा
  • ऋषिगंगा पावर प्रॉजेक्‍ट को भी हुआ नुकसान, बढ़ रहा नदियों का जलस्‍तर
  • SDRF हाई अलर्ट पर, प्रशासन की टीमों को जल्द से जल्द पहुंचने के निर्देश

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नई दिल्ली
उत्‍तराखंड से बेहद भयावह खबर आ रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, चमोली के बाद ग्‍लेशियर टूटने से भारी हिमस्खलन हुआ है। भारी तबाही की आशंका जताई जा रही है। ग्‍लेशियर की बर्फ धौलीगंगा नदी में बह रही है और आसपास के इलाकों में जान-माल के भारी नुकसान का डर है। राज्‍य में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है और रेस्‍क्‍यू टीम्‍स को मौके पर भेजा गया है। ऋषिगंगा पावर प्रॉजेक्‍ट को भी नुकसान की खबर है। अलकनंदा नदी के किनारे रहने वालों को फौरन सुरक्षित स्‍थानों की ओर जाने के निर्देश दिए गए हैं। ऐहतियात के तौर पर भागीरथी नदी का पानी रोक दिया गया है। श्रीनगर डैम और ऋषिकेश डैम को खाली करा लिया गया है।

कैसे टूटता है ग्‍लेशियर?
ग्‍लेश‍ियर सालों तक भारी मात्रा में बर्फ के एक जगह जमा होने से बनता है। ये दो तरह के होते हैं- अल्‍पाइन ग्‍लेशियर और आइस शीट्स। पहाड़ों के ग्‍लेशियर अल्‍पाइन कैटेगरी में आते हैं। पहाड़ों पर ग्‍लेशियर टूटने की कई वजहें हो सकती हैं। एक तो गुरुत्‍वाकर्षण की वजह से और दूसरा ग्‍लेशियर के किनारों पर टेंशन बढ़ने की वजह से। ग्‍लोबल वार्मिंग के चलते बर्फ पिघलने से भी ग्‍लेशियर का एक हिस्‍सा टूटकर अलग हो सकता है। जब ग्‍लेशियर से बर्फ का कोई टुकड़ा अलग होता है तो उसे काल्विंग कहते हैं।

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कैसे आती है ग्‍लेशियर बाढ़?
ग्‍लेशियर फटने या टूटने से आने वाली बाढ़ का नतीजा बेहद भयानक हो सकता है। ऐसा आमतौर पर तब होता है जब ग्‍लेशियर के भीतर ड्रेनेज ब्‍लॉक होती है। पानी अपना रास्‍ता ढूंढ लेता है और जब वह ग्‍लेशियर के बीच से बहता है तो बर्फ पिघलने का रेट बढ़ जाता है। इससे उसका रास्‍ता बड़ा होता जाता है और साथ में बर्फ भी पिघलकर बहने लगती है। इंसाइक्‍लोपीडिया ब्रिटैनिका के अनुसार, इसे आउटबर्स्‍ट फ्लड (Outburst flood) कहते हैं। ये आमतौर पर पहाड़ी इलाकों में आती हैं। कुछ ग्‍लेशियर हर साल टूटते हैं, कुछ दो या तीन साल के अंतर पर। कुछ कब टूटेंगे, इसका अंदाजा लगा पाना लगभग नामुमकिन होता है।



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उत्‍तराखंड में भारी नुकसान की आशंका
उत्‍तराखंड में ग्‍लेशियर टूटने के बाद, पानी के तेज बहाव के मद्देनजर कीर्ति नगर, देवप्रयाग, मुनि की रेती इलाकों को अलर्ट पर रहने को कहा गया है। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुताबिक, 'अभी तक हमें जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक दो पुल के बहने की खबर है।' उन्‍होंने कहा कि जनहानि होने की आशंका भी है, लेकिन अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। SDRF और जिला प्रशासन की टीमों को जल्द से जल्द घटनास्थल पर पहुंचने का निर्देश दिया गया है।

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