बिहार में बवाल के बाद तेजस्वी यादव, तेजप्रताप समेत कई RJD नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज

बिहार में बवाल के बाद तेजस्वी यादव, तेजप्रताप समेत कई RJD नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज

हाइलाइट्स:

  • मंगलवार को बिहार में सड़क से लेकर विधानसभा तक जमकर हंगामा
  • तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और अन्य RJD नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज
  • विधानसभा में हुए हंगामे में कई विधायकों को चोटें भी आई, मीडियाकर्मी भी घायल

पटना
23 मार्च मंगलवार का दिन बिहार की राजनीति के लिए काफी उथल पुथल वाला और शर्मनाक रहा। एक तरफ जहां बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सड़क पर प्रदर्शन कर रहे RJD कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई तो दूसरी तरफ विशेष सशस्त्र पुलिस विधयेक का विरोध कर रहे विपक्षी विधायकों ने सदन में जमकर हंगामा किया। जिसके आरजेडी के विधायकों के साथ पुलिस ने काफी धक्का-मुक्की और बदसलूकी भी की। इस बीच पटना में हिंसक प्रदर्शन करने के आरोप में तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और अन्य RJD नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है।

सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए FIR
मंगलवार को तेजस्वी यादव के नेतृत्व में आरजेडी कार्यकर्ता बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई और कानून व्यवस्था के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन करने सड़क पर उतरे थे। ये लोग विधानसभा का घेराव करने के लिए आगे बढ़ ही रहे थे कि डाकबंगला चौराहे पर पुलिस ने इनको रोक दिया। इसके बाद पुलिस और आरजेडी कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प भी हुई। पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया तो आरजेडी वर्कर्स ने पुलिस पर पत्थर चलाए। इसके बाद पुलिस के लाठीचार्ज में कई आरजेडी वर्कर्स चोटिल भी हुए। इन लोगों पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई।

तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन
इस मार्च का नेतृत्व करने से पहले तेजस्वी ने उर्दू की यह मशहूर पंक्तियां भी ट्वीट की थी, ‘सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है।’ इसके जरिए उन्होंने यह संकेत देने की कोशिश की थी कि वह करो या मरो के लिए तैयार हैं। मार्च के रास्ते में भारी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किये गये थे। दरअसल, यह मार्च प्रशासन की अनुमति के बगैर निकाला गया था और प्रदर्शनकारी कोविड-19 नियमों का पालन नहीं कर रहे थे।

विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक को लेकर विधानसभा में भी हंगामा
दूसरी तरफ बिहार विधानसभा में विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक पारित हो गया। विधानसभा में बिल की कॉपी फाड़ने से शुरू हुआ विवाद लात-जूता और मारपीट तक पहुंच गया। बिल को लेकर विपक्ष और सरकार आमने-सामने की जंग लड़ने लगे। विपक्ष किसी भी सूरत में बिहार विशेष पुलिस सशस्त्र विधेयक 2021 को पास होने देना नहीं चाहता था। जबकि सरकार को लगता है कि इस विधेयक के कानून बनने से महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में मदद मिलेगी। इस दौरान हंगामे से शुरू का सदन का सत्र शाम होते-होते पिटाई-कुटाई तक पहुंच गया। कई विधायकों को चोटें भी आई है। कुछ मीडियाकर्मी भी जख्मी हैं।

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