अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने इमरान को दिया झटका, भारत आएंगे जॉन कैरी, पाकिस्‍तान को ना

अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने इमरान को दिया झटका, भारत आएंगे जॉन कैरी, पाकिस्‍तान को ना

हाइलाइट्स:

  • अमेरिका के जो बाइडेन प्रशासन ने पाकिस्‍तान की इमरान सरकार को करारा झटका दिया है
  • जलवायु परिवर्तन पर अमेरिकी राष्‍ट्रपति के विशेष दूत जॉन कैरी भारत जाएंगे लेकिन पाकिस्‍तान नहीं
  • वह भी तब जब जलवायु परिवर्तन के महासंकट से सर्वाधिक जूझ रहे देशों में पाकिस्‍तान शामिल है

वॉशिंगटन
अमेरिका के जो बाइडेन प्रशासन ने पाकिस्‍तान को करारा झटका दिया है। जलवायु परिवर्तन पर अमेरिकी राष्‍ट्रपति के विशेष दूत जॉन कैरी भारत, बांग्‍लादेश की यात्रा करेंगे लेकिन इस महासंकट से सर्वाधिक जूझ रहे देशों में शामिल पाकिस्‍तान नहीं जाएंगे। जानकारी के मुताबिक कैरी जलवायु संकट पर चर्चा करने के लिए एक से नौ अप्रैल के बीच भारत, बांग्लादेश और यूएई की यात्रा पर जाएंगे।

पाकिस्‍तानी अखबार डॉन के मुताबिक केरी के पाकिस्‍तान नहीं आने और जलवायु परिवर्तन पर शिखर सम्‍मेलन में इमरान खान को न्‍योता नहीं देने से कई लोगों की त्योरियां चढ़ गई हैं। लोगों को मानना है कि यह पाकिस्‍तान के लिए बड़ा झटका है। दक्षिण एशियाई मामलों के अमेरिकी विशेषज्ञ माइक कुगेलमैन ने कहा, 'पहले पाकिस्‍तान को वाइट हाउस के वैश्विक जलवायु परिवर्तन शिखर सम्‍मेलन में न्‍यौता नहीं दिया गया। अब अमेरिका के जलवायु दूत जॉन कैरी चर्चा के लिए भारत और बांग्‍लादेश जा रहे हैं।'

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि 22-23 अप्रैल के बीच जलवायु परिवर्तन पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन बाइडन द्वारा आयोजित ‘नेताओं के शिखर सम्मेलन’ और इस वर्ष के अंत में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी26) से पहले कैरी इस मुद्दे पर विचार विमर्श के लिए इन देशों की यात्रा करेंगे। कैरी ने ट्वीट किया, ‘जलवायु संकट से निपटने के लिए अमीरात, भारत और बांग्लादेश में दोस्तों के साथ सार्थक चर्चा को लेकर उत्साहित हूं।’

40 नेताओं संग जलवायु परिवर्तन से निपटने को लेकर वार्ता
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत विश्व के 40 नेताओं को जलवायु परिवर्तन से निपटने को लेकर वार्ता के मकसद से आयोजित होने वाले ‘नेताओं के शिखर सम्मेलन’ के लिए आमंत्रित किया है। इस शिखर सम्मेलन का मकसद जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने के आर्थिक लाभ एवं महत्व को रेखांकित करना है। वाइट हाउस ने पिछले सप्ताह कहा था, ‘यह ग्लासगो में इस साल नवंबर में होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी26) के मार्ग में एक मील का पत्थर साबित होगा।’

वाइट व्हाइट हाउस के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के अलावा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा, ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, सऊदी अरब के शाह सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन समेत 40 नेताओं को शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया गया है। इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया जाएगा।



वैश्विक स्तर पर 80 प्रतिशत उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार
इन नेताओं के अलावा दक्षिण एशिया से बंग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और भूटान के प्रधानमंत्री लोते शेरिंग को भी सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। वाइट हाउस ने कहा कि इस शिखर सम्मेलन और सीओपी26 का मुख्य लक्ष्य वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने के प्रयासों को गति देना है। उसने कहा कि इस सम्मेलन में इन उदाहरणों को भी रेखांकित किया जाएगा कि जलवायु महत्वाकांक्षा से अच्छे वेतन वाली नौकरियां कैसे पैदा होती हैं, नवोन्मेषी तकनीक विकसित करने में कैसे मदद मिलती है और कमजोर देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के अनुसार ढलने में कैसे सहायता मिलती है। इस सम्मेलन में वे 17 देश भाग लेंगे, जो वैश्विक स्तर पर 80 प्रतिशत उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं और वैश्विक जीडीपी में उनकी 80 प्रतिशत भूमिका है।

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