अकाउंट में 1200 करोड़, 66 बार कोशिश... साइबर सेल को सब पहले से था 'पता'... कब-क्या हुआ पढ़ें पूरी कहानी

हाइलाइट्स

  • पूरे गैंग को दबोचना था, इसलिए आरोपियों को करने दी इतनी कोशिश
  • आरोपियों में बैंक कर्मचारी, रियल एस्टेट बिजनेस से जुड़े लोग शामिल
  • इस मामले में पुलिस ने बैंक स्टाफ समेत 12 लोगों को अरेस्ट किया है

नई दिल्ली: अमेरिका में रह रहे सीनियर सिटिजन के खाते में सेंधमारी करके 66 बार पैसे निकालने की कोशिश करने वाले 12 आरोपियों ने फुलप्रूफ प्लानिंग की थी। उन्हें पूरा भरोसा था कि वह एक ना एक दिन एनआरआई के अकाउंट से करोड़ों रुपये निकाल ही लेंगे। लेकिन वह पैसे निकालने में कामयाब नहीं हो पा रहे थे। इसका असल कारण था दिल्ली पुलिस की साइबर सेल। उसे इस मामले की जानकारी आरोपियों की दूसरी कोशिश में ही लग गई थी। तब से ही साइबर सेल इस गैंग को एक साथ पकड़ने के लिए जाल बिछा रही थी, जबकि आरोपी यह सोच रहे थे कि उनके इरादों की किसी को भनक ही नहीं लगी है। अमेरिका में रह रहे NRI के अकाउंट और इनसे लिंक अकाउंट्स में 10-20 करोड़ रुपये नहीं, बल्कि करीब 1200 करोड़ रुपये जमा हैं। जिनका लेन-देन काफी समय से बंद पड़ था। इसकी जानकारी आरोपियों को लग गई थी। फिर शुरू हुआ इनके अकाउंट से पैसे निकालने की कोशिश का यह खेल। इसका भंडाफोड़ किया स्पेशल सेल की साइबर क्राइम यूनिट के डीसीपी के पीएस मल्होत्रा, एसीपी रमन लांबा, इंस्पेक्टर समरपाल, अरुण वर्मा, ब्रह्म प्रकाश, विजेंद्र और इनकी टीम ने। मामले में बैंक के भी कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई है।

इस साल जनवरी से हुई शुरुआत
एनआरआई के अकाउंट से पैसे निकालने की प्लानिंग पिछले साल नवंबर-दिसंबर से ही बननी शुरू हो गई थी, जब आरोपियों को खाते के बारे में पता लगा। आरोपी इस साल जनवरी में इसमें कामयाब भी हुए। उन्होंने पंजाब के मोहाली बैंक से एनआरआई के खाते से चेक लगाकर दो करोड़ रुपये निकाल भी लिए थे। इसकी शिकायत एनआरआई ने बैंक से की। बैंक ने उनके पैसे वापस कर दिए। मोहाली पुलिस ने दो लोगों को पकड़ा, लेकिन वो इस गैंग के नहीं निकले। उनसे किसी और मामले का खुलासा हुआ। मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

जून से फिर सक्रिय हुए आरोपी
आरोपियों ने जून महीने में एनआरआई के अकाउंट से यूपी गाजियाबाद वाली ब्रांच से दो करोड़ रुपये निकालने की कोशिश की। इसके लिए 50-50 लाख रुपये के चार चेक लगाए गए। चूंकि एनआरआई के अकाउंट से पहले ही दो करोड़ रुपये निकल चुके थे। इसके बाद उनके अकाउंट को अलर्ट मोड पर डाल दिया गया था, ताकि किसी भी सूरत में असली खाताधारी से संपर्क किए बिना उनके अकाउंट से पैसा न निकल पाए। जून में की गई कोशिश का पता एनआरआई को भी लग गया। इसकी शिकायत बैंक में और फिर पुलिस में की गई।

फाइनेंस मिनिस्ट्री से भी दी गई थी डिटेल
एनआरआई ने इसकी शिकायत बैंक के अलावा केंद्रीय वित्त मंत्रालय में भी की। जहां से दिल्ली पुलिस कमिश्नर का चार्ज संभालने के बाद इसकी तमाम डिटेल आईपीएस राकेश अस्थाना को देकर मामले को देख लेने के लिए कहा गया। हालांकि, इससे पहले ही इस मामले में दिल्ली पुलिस जांच कर रही थी, लेकिन पुलिस कमिश्नर अस्थाना को मिली शिकायत के बाद इस मामले की तफ्तीश साइबर सेल के डीसीपी केपीएस मल्होत्रा ने शुरू कर दी। इसका परिणाम कुछ ही दिनों बाद इनकी गिरफ्तारी के रूप में सामने आ गया।

आईपी एड्रेस से पकड़े गए आरोपी
साइबर सेल को आरोपियों का एक आईपी एड्रेस दिल्ली का मिल गया। आरोपी तक पहुंचने के लिए साइबर सेल ने तमाम सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को अलर्ट करते हुए इसकी जानकारी ले ली, लेकिन साइबर सेल ने बैंक से बोल दिया कि अभी वह इस मामले में हैकर्स द्वारा पैसे निकालने के जितने भी प्रयास किए जा रहे हैं, करने दो। अभी पकड़ने की कोशिश की तो एक-दो ही पकड़ में आएंगे। कुछ दिनों का इंतजार करो, पूरे गैंग को ही पकड़ेंगे। इस तरह जब आरोपियों ने 5 करोड़ रुपये और निकालने की कोशिश करते हुए 66वीं बार प्रयास किया तो इस पूरे गैंग को पकड़ लिया गया। अभी तक दिल्ली, यूपी और हरियाणा में छापे मारकर 12 आरोपी पकड़े जा चुके हैं।

खुद को 'डॉक्टर' बताने वाला मास्टरमाइंड फरार
इस गैंग के दो मास्टरमाइंड बताए गए हैं। इनमें डॉक्टर नाम का एक मास्टरमाइंड अभी फरार है। दूसरा पकड़ लिया गया है। गैंग के सभी मेंबर इसे डॉक्टर के नाम से ही जानते हैं। इसके बारे में सभी को यह पता है कि यह मोदीनगर के किसी प्राइवेट हॉस्पिटल का बड़ा डॉक्टर है। अभी इस मामले में बैंक के पांच से छह स्टाफ से और पूछताछ की जा रही है। गैंग के तीन से चार लोग अभी और फरार हैं। आरोपियों में से कई रियल एस्टेट के बिजनेस से जुड़े हैं।

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