नोएडा में डेंगू से दम तोड़ते बच्चे, मरीजों से भरे अस्पताल.. प्रशासन की अजब दलील तो जानिए

हाइलाइट्स

  • यूपी के नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बुखार का कहर बढ़ता जा रहा है
  • बीते दो दिन में दो मासूमों की मौत हो गई, इसमें एक में डेंगू की पुष्टि
  • एक दिन पहले एक गर्भवती की भी मौत संभावित डेंगू से बताई गई

नोएडा
यूपी के नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बुखार का कहर बढ़ता जा रहा है। बीते दो दिन में दो मासूमों की मौत हो गई है। इसमें एक में डेंगू की पुष्टि हुई है। एक दिन पहले एक गर्भवती की भी मौत संभावित डेंगू से बताई जा रही है, लेकिन एक सप्ताह बाद भी कोई जांच नहीं हो सकी। अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक जिले में 20 से 25 मरीज बुखार से दम तोड़ चुके हैं, लेकिन दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग बुखार को बीमारी ही नहीं मान रहा है।

जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. राजेश शर्मा ने बुखार को कोई परेशानी मानने से ही इनकार कर दिया है। राजेश शर्मा के मुताबिक मरीज को कोई अन्य बीमारी होती है, तभी उसे बुखार आता है। बुखार किसी बीमारी का एक लक्षण है, बुखार कोई बीमारी नहीं है। कुछ लोग इसे रहस्यमयी बुखार कह रहे हैं। डॉक्टर को भी कई-कई जांच होने के बाद भी यह नहीं पता चल रहा कि बुखार क्यों आ रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. राजेश शर्मा का कहना है कि बुखार कोई बीमारी ही नहीं है।

30% बेड बुखार के मरीजों से भरे
आईएमए के प्रेजिडेंट डॉ. सुनील अवाना के मुताबिक निजी अस्पतालों में 30 से 40 फीसदी बेड बुखार और डेंगू के मरीजों से भरे हुए हैं। इनमें करीब 15 फीसदी मरीज डेंगू और बाकी मरीज बुखार के भर्ती हैं। लगातार बुखार के मरीज आने से अस्पतालों के बेड खाली नहीं हो रहे हैं।

 

बुखार एक बीमारी है और किसी भी बीमारी के शुरू होने से पहले अगर बुखार आता है तो बुखार एक वॉर्निंग होती है। किसी भी बीमारी का पहला चरण बुखार होता है। बुखार का मतलब शरीर में इंफेक्शन से होता है। यह इंफेक्शन वायरस, बैक्टीरिया का हो सकता है।
डॉ. सुनील अवाना (प्रेजिडेंट, आईएमए)

 

बुखार के मामलों की नहीं हुई जांच
18 और 19 अक्टूबर को बुखार से दो बच्चों की मौत हो गई। घरवालों ने मौत की वजह डेंगू बताया था, हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने अब तक कोई जांच नहीं की। लिहाजा मृतक बच्चों में डेंगू की पुष्टि नहीं हो सकी है। अब तक बुखार से तीन बच्चों की मौत हो चुकी है। यह तीनों बच्चे 10 से 14 वर्ष की उम्र के थे। इनमें एक बच्चे में डेंगू की पुष्टि हुई। वहीं अबतक करीब 66 फीसदी से अधिक बच्चे डेंगू की चपेट में आ चुके हैं।

चाइल्ड पीजीआई में रोज भर्ती हो रहे डेंगू 15 से 20 बच्चे
बच्चों में बुखार के साथ डेंगू का प्रकोप अधिक देखने को मिल रहा है। चाइल्ड पीजीआई की कार्यवाहक निदेशक डॉ. ज्योत्सना मदान ने बताया कि डेंगू के रोज 15 से 20 बच्चे भर्ती हो रहे हैं। ठीक होने पर डिस्चार्ज भी किया जा रहा है, लेकिन लगातार डेंगू मरीज आ रहे हैं। कभी कम कभी ज्यादा हो रहे हैं। अभी स्थिति पहले जैसी ही है कुछ परिवर्तन नहीं देखने को मिला है। लेकिन अच्छी बात यह है कि अब तक यहां पर किसी डेंगू पीड़ित बच्चे की मौत नहीं हुई है।

सीएमओ डॉ. सुनील कुमार शर्मा का कहना है कि जांच बढ़ने से डेंगू मरीज बढ़े हैं। चाइल्ड पीजीआई में निःशुल्क डेंगू जांच इस साल शुरू करवाई गई है। अब तक सिर्फ जिला अस्पताल में ही डेंगू जांच होती थी।

डेंगू के मरीज 300 के करीब
शुक्रवार की रिपोर्ट के मुताबिक, शहर में डेंगू मरीजों का आंकड़ा 300 के करीब पंहुच गया है। बीते 24 घंटे में 12 नए डेंगू मरीज मिलने से संख्या 287 हो गई है। अस्पतालों में डेंगू, बुखार के मरीजों से बेड भरे हुए हैं। प्लेटलेट्स और खून की मांग भी बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक डेंगू से मृत बच्चे के घर के आसपास के इलाकों में एक सप्ताह तक फॉगिंग की जाएगी। एंटी लार्वा का छिड़काव करके डेंगू से बचाव की अपील की जा रही है। डेंगू मरीजों के आंकड़े छुपाने के मामले में स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पतालों को नोटिस जारी कर सकता है।

कब किसकी हुई मौत -
- 6 अक्टूबर को 10 वर्षीय डेंगू संभावित बच्चे की निजी अस्पताल में मौत हो गई थी। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक बच्चे का डेंगू एलाइजा टेस्ट नहीं हुआ था। जेवर सीएचसी से चाइल्ड पीजीआई लाते समय रास्ते में मासूम की मौत हुई थी।

- 18 अक्टूबर को गर्भवती की निजी अस्पताल में मौत हुई। निजी अस्पताल सहित स्वास्थ्य विभाग गर्भवती में डेंगू की पुष्टि नहीं कर सका।
- 19 अक्टूबर को 14 वर्षीय बच्चे की मौत निजी अस्पताल डेंगू से हुई। स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू से मौत की पुष्टि कर दी है।
- 20 अक्टूबर को 14 वर्षीय बच्ची की बुखार से जिला अस्पताल मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग डेंगू की पुष्टि नहीं कर सका।

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