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अब बलात्कारियों को मिलेगी फांसी की सजा, विधानसभा में पेश हुआ शक्ति विधेयक

हाइलाइट्स

  • महाराष्ट्र विधानसभा में पेश हुआ शक्ति विधेयक
  • महिलाओं की सुरक्षा के लिए बना है यह विधेयक
  • इसमें रेपिस्ट को फांसी की सजा देने का प्रावधान है
  • झूठी शिकायत करने वाले के खिलाफ भी कार्रवाई का नियम

मुंबई
विधानसभा के शीतकालीन अधिवेशन के पहले दिन ही गृह मंत्री दिलीप वलसे पाटील ने विधानसभा में शक्ति विधेयक पेश किया। विधेयक में महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों को रोकने के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। इसमें बलात्कारियों को न्यूनतम 10 साल, नाबालिग के साथ बलात्कार करने वालों को न्यूनतम 20 साल, सामूहिक बलात्कार करने वालों को न्यूनतम 20 साल और अधिकतम सजा के रूप में उम्र कैद से लेकर मृत्युदंड तक का प्रावधान किया गया है। वहीं, कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए झूठी शिकायत करने वालों को भी 1 वर्ष से 3 वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

बता दें कि पिछले साल यह विधेयक विधानसभा में तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख ने पेश किया था। लेकिन तब इस विधेयक के सख्त प्रावधानों को देखते हुए सदन में यह आम राय बनी थी कि इसे अधिक विचार मंथन के लिए दोनों सदनों की संयुक्त समिति के पास भेजा जाए। संयुक्त समिति में विधानमंडल के दोनों सदनों के 21 सदस्य थे, जिनमें 10 महिला विधायक भी थीं। अब संयुक्त समिति की रिपोर्ट में दिए गए सुझावों को शामिल करते हुए गृह मंत्री दिलीप वलसे पाटील ने संशोधित शक्ति विधेयक पेश किया।

मोबाइल कंपनियों पर कसेगी नकेल
शक्ति विधेयक में यह प्रावधान भी किया गया है कि महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले किसी भी यौन अपराध की जांच में अधिकारियों द्वारा संबंधित मोबाइल टेलिफोन या इंटरनेट डेटा प्रदान करने वाली कंपनी से मांगी गई तमाम जानकारियां 3 दिन के भीतर दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक्स सबूतों के रूप में उपलब्ध करानी होंगी। उनके ऐसा न करने पर संबंधित अधिकारियों को 3 महीने की कैद और 25 लाख रुपये तक जुर्माने की सजा दी जा सकती है।

30 दिन में पूरी होगी जांच
शक्ति विधेयक के पहले मसौदे में अपराध दर्ज होने की तारीख से 15 दिन के भीतर जांच पूरी होने का प्रस्ताव था। इसमें कोई अड़चन आने पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर इसे अधिकतम 7 दिन तक बढ़ाया जा सकता था। संयुक्त समिति ने जांच अधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद यह पाया कि इतने कम समय में जांच करने से गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसीलिए इसे बढ़ाकर 30 दिन कर दिया गया है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर इसे अधिकतम 30 दिन के लिए और बढ़ाया जा सकता है।

ऐसिड फेंकने वालों की सजा बढ़ेगी
महिलाओं पर ऐसिड हमले करने वालों का अपराध सिद्ध होने पर पहले 10 साल की सजा का प्रावधान था, लेकिन संशोधित विधेयक में इस सजा को बढ़ाकर न्यूनतम 15 साल और अधिकतम सजा स्वाभाविक मृत्यु होने तक जेल में ही रखने की होगी। अपराधियों से वसूले जाने वाले जुर्माने की रकम से पीड़ित महिला की प्लास्टिक सर्जरी का खर्च भी देने का प्रावधान किया गया है।

कितनी सजा मिलेगी
- बलात्कारियों को कम से कम 10 साल

- नाबालिग से बलात्कार करने वालों को कम से कम 20 साल

- सामूहिक बलात्कार करने वालों को कम से कम 20 साल

- अधिकतम सजा उम्र कैद से मृत्युदंड तक

- झूठी शिकायत करने वालों की खैर नहीं