भगवान बुद्ध के बाल पर टिकी है सोने की रहस्यमय चट्टान! चमत्कार या विज्ञान ?

हाइलाइट्स

  • म्यांमार की गोल्डेन रॉक है पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र
  • एक गहरी खाईं के किनारे पर अद्भुत संतुलन से टिकी हुई है 25 फीट ऊंची चट्टान
  • लोगों का मानना है कि भगवान बुद्ध की शक्तियों से रुकी हुई है विशालकाय चट्टान

नायपीडॉ
म्यांमार के मोन राज्य में स्थित प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ स्थल क्याइक्तियो पगोडा को गोल्डन रॉक के नाम से भी जाना जाता है। यह क्याइक्तियो पहाड़ियों के शीर्ष पर स्थित है। बादलों से घिरे इस स्थल की उत्पत्ति के रहस्य और पौराणिक कथाएं तीर्थयात्रियों और आगंतुकों आकर्षित करती हैं। करीब 25 फीट ऊंची यह चट्टान अपने आप में एक आश्चर्य है, जो एक गहरी खाईं के किनारे पर संतुलन से टिकी हुई है।

किसी भी आम इंसान के लिए यह आश्चर्यजनक और लगभग असंभव सा लगने वाला नजारा हो सकता है। लेकिन भक्तों के लिए यह भगवान के होने का सबूत है। उपासकों का मानना है कि बुद्ध की चमत्कारी शक्तियों के चलते चट्टान संतुलन में रहती है। माना जाता है कि चट्टान और पहाड़ी के बीच बुद्ध के बाल का एक किनारा रखा हुआ है जिसकी वजह से यह अद्भुत संतुलन बना हुआ है।

प्राकृतिक आश्चर्य बन गया आस्था का केंद्र
कुछ लोग इस निर्माण पर सवाल भी उठाते हैं और इसकी पौराणिक कथाओं पर विश्वास नहीं करते हैं। स्मिथसोनियन चैनल की डॉक्यूमेंट्री 'वंडर्स ऑफ बर्मा: श्राइन्स ऑफ गोल्ड' के दौरान इसकी कहानी और इतिहास की खोज की गई। इसमें इस स्थल की अद्भुत 'शक्ति' का उल्लेख किया गया है जो गुरुत्वाकर्षण को चकमा देती है। खोजकर्ताओं के अनुसार यह एक प्राकृतिक आश्चर्य है जिसे कहानियों ने एक पवित्र स्थल बना दिया है।

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चट्टान को खिसकने से रोक रहा भगवान का बाल
स्थानीय तौर पर कई कहानियां इस जगह को लेकर प्रचलित हैं। एक कहानी के मुताबिक चट्टान को बाल के ऊपर रखा गया है और बाल चट्टान को पहाड़ से नीचे खिसकने से रोकने में मदद करते हैं। यहां बने मंदिर और इसकी पीछे की कहानियों ने माउंट क्याइक्तियो और गोल्डेन रॉक को पूरे देश में सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय स्थानों में से एक बना दिया है।

गोल्डन रॉक पूरे साल दुनियाभर के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है। वहीं नवंबर से मार्च के बीच यहां भक्ति का माहौल देखने को मिलता है। पूरे म्यांमार से लोग यहां आते हैं और मंत्रोच्चार करते हैं, मोमबत्तियाँ जलाते हैं, ध्यान लगाते हैं और बुद्ध को प्रसाद का भोग लगाते हैं।

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