पाकिस्तान के पेशावर की जामा मस्जिद में बम बांधकर घुसे हमलावरों ने खुद को उड़ाया, 30 मौतें

हाइलाइट्स

  • पाकिस्तान के पेशावर में आत्मघाती हमला, 30 लोगों की मौत
  • हमलावर ने जुमे की नमाज पढ़ रहे लोगों को बनाया निशाना
  • पहले भी मस्जिदों पर हो चुके हैं कई हमले, आईएसआईएस पर हमले का शक

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पेशावर में हुए आत्मघाती हमले में कम से कम 30 लोग मारे गए हैं। बताया जा रहा है कि हमलावर ने जुमे की नमाज पढ़ने मस्जिद में जमा हुई भीड़ को निशाना बनाया। इस घटना में 50 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है। घायलों को पेशावर के लेडी रीडिंग अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। घमाके के बाद मौके पर पहुंचे आसपास के लोगों ने घायलों को अपनी मोटरसाइकिलों और कार पर लादकर अस्पताल पहुंचाया है।

पुलिस ने पूरे इलाके को घेर चलाया तलाशी अभियान
जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस और दूसरे सुरक्षाबलों ने धमाके वाले इलाके की घेराबंदी कर दी है। पुलिस को शक है कि इस घमाके को अंजाम देने वाले आत्मघाती हमलावर के सहयोगी आसपास मौजूद हो सकते हैं। लेडी रीडिंग अस्पताल के प्रवक्ता का कहना है कि 10 घायलों की हालत गंभीर है। ऐसे में मरने वालों की तादाद और ज्यादा बढ़ सकती है।

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अस्पताल लाए गए 30 शव
पेशावर के राजधानी शहर के पुलिस अधिकारी (सीसीपीओ) एजाज अहसान ने इस हमले में एक पुलिस अधिकारी के मारे जाने की पुष्टि की है। वहीं, लेडी रीडिंग अस्पताल के मीडिया मैनेजर असीम खान ने कहा कि अब तक 30 शव अस्पताल लाए जा चुके हैं।

हमले में दो आत्मघाती हमलावरों का हाथ
एजाज अहसान ने बताया कि शुरुआती खबरों के मुताबिक, पेशावर के किस्सा ख्वानी बाजार में दो हमलावरों ने एक मस्जिद में घुसने की कोशिश की। उन्होंने पहले मस्जिद की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों पर फायरिंग कर दी। इस घटना में एक पुलिसकर्मी मौके पर ही मारा गया, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। इस हमले के कुछ देर बाद ही मस्जिद में जोरदार धमाका हुआ।

ऑस्ट्रेलियाई टीम के पाकिस्तान पहुंचे के चंद घंटे बाद हुआ हमला
बड़ी बात यह है कि इस हमले के चंद घंटे पहले ही ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम पाकिस्तान पहुंची है। उनकी सुरक्षा को लेकर पहले से ही चिंता जताई जा रही थी। अब इस हमले से पाकिस्तान की परेशानी फिर से बढ़ने की आशंका है। 2009 में श्रीलंका टीम पर आतंकी हमला होने के बाद करीब 10 साल तक पाकिस्तान में कोई टेस्ट मैच नहीं हुआ था। टीम से वर्ल्ड कप 2011 की मेजबानी भी छीन गई थी। ऑस्ट्रेलिया का दौरा पाकिस्तान क्रिकेट के लिए छवि सुधारने का बड़ा मौका बताया जा रहा था, लेकिन अब इसपर सवाल उठ रहे हैं।

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